पद्यांश: सावधान, मनुष्य! यदि विज्ञान है तलवार,
तो इसे दे फेंक, तज कर मोह, स्मृति के पार।
हो चुका है सिद्ध, है तू अभी शिशु नादान;
फूल-काँटों की तुझे, कुछ भी नहीं पहचान।
खेल सकता तू नहीं ले हाथ में तलवार,
काट लेगा अंग, तीखी है बड़ी यह धार।
(iv) कवि ने तलवार किसे बताया है और इसका प्रयोग करने से मनुष्य को क्यों रोका है?