List of top Questions asked in UP Board XII

अपठित गद्यांश: जीवन में सफल वही है, जो उपयुक्त समय पर उपयुक्त चुनाव करना जानता है। कुछ चुनाव हमारे वश में नहीं हैं - जैसे माता-पिता का, जन्म-मृत्यु का। किन्तु कुछ हमारे वश में हैं जिन पर हमारी सफलता असफलता निर्भर है - जैसे संगति का चुनाव, आलस्य या परिश्रम का चुनाव आदि। संगति का चुनाव इन सब में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस चुनाव पर हमारा आचरण, कर्म, विचार, भाषा - स्तर, मनुष्यता और हमारी सफलता-असफलता निर्भर करती है। मनुष्य का चित्त बुराइयों की ओर जल्दी आकृष्ट हो जाता है। जिस प्रकार पानी सदैव नीचे की ओर बहता है, उसी प्रकार मनुष्य का मन भी बुराइयों की ओर शीघ्र भागता है। हम विवेक से काम लेकर अच्छे और बुरे का चुनाव कर सकते हैं और सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
(ii) मानव मन की तुलना किससे की गई है और क्यों?
अपठित गद्यांश: जीवन में सफल वही है, जो उपयुक्त समय पर उपयुक्त चुनाव करना जानता है। कुछ चुनाव हमारे वश में नहीं हैं - जैसे माता-पिता का, जन्म-मृत्यु का। किन्तु कुछ हमारे वश में हैं जिन पर हमारी सफलता असफलता निर्भर है - जैसे संगति का चुनाव, आलस्य या परिश्रम का चुनाव आदि। संगति का चुनाव इन सब में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस चुनाव पर हमारा आचरण, कर्म, विचार, भाषा - स्तर, मनुष्यता और हमारी सफलता-असफलता निर्भर करती है। मनुष्य का चित्त बुराइयों की ओर जल्दी आकृष्ट हो जाता है। जिस प्रकार पानी सदैव नीचे की ओर बहता है, उसी प्रकार मनुष्य का मन भी बुराइयों की ओर शीघ्र भागता है। हम विवेक से काम लेकर अच्छे और बुरे का चुनाव कर सकते हैं और सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
(iii) जीवन में कौन सफलता प्राप्त कर सकता है?
अपठित गद्यांश: जीवन में सफल वही है, जो उपयुक्त समय पर उपयुक्त चुनाव करना जानता है। कुछ चुनाव हमारे वश में नहीं हैं - जैसे माता-पिता का, जन्म-मृत्यु का। किन्तु कुछ हमारे वश में हैं जिन पर हमारी सफलता असफलता निर्भर है - जैसे संगति का चुनाव, आलस्य या परिश्रम का चुनाव आदि। संगति का चुनाव इन सब में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस चुनाव पर हमारा आचरण, कर्म, विचार, भाषा - स्तर, मनुष्यता और हमारी सफलता-असफलता निर्भर करती है। मनुष्य का चित्त बुराइयों की ओर जल्दी आकृष्ट हो जाता है। जिस प्रकार पानी सदैव नीचे की ओर बहता है, उसी प्रकार मनुष्य का मन भी बुराइयों की ओर शीघ्र भागता है। हम विवेक से काम लेकर अच्छे और बुरे का चुनाव कर सकते हैं और सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
(i) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
अपठित गद्यांश: शिक्षा व्यक्ति और समाज दोनों के विकास के लिए अनिवार्य है। अज्ञान के अंधकार में जीना तो मृत्यु से भी अधिक कष्टकारी है। ज्ञान के प्रकाश में ही जीवन के रहस्य खुलते हैं और हमें अपनी पहिचान मिलती है। शिक्षा मनुष्य को मष्तिष्क और देह का उचित प्रयोग करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्यपुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिन्तन न दे व्यर्थ है। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सच्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ? संसार के सभी वैभव व सुख साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो।
(iii) सभी वैभव प्राप्त व्यक्ति कब तक सुख नहीं प्राप्त कर सकता?
अपठित गद्यांश: शिक्षा व्यक्ति और समाज दोनों के विकास के लिए अनिवार्य है। अज्ञान के अंधकार में जीना तो मृत्यु से भी अधिक कष्टकारी है। ज्ञान के प्रकाश में ही जीवन के रहस्य खुलते हैं और हमें अपनी पहिचान मिलती है। शिक्षा मनुष्य को मष्तिष्क और देह का उचित प्रयोग करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्यपुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिन्तन न दे व्यर्थ है। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सच्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ? संसार के सभी वैभव व सुख साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो।
(ii) शिक्षा को मनुष्य के लिए क्यों अनिवार्य माना गया है?
अपठित गद्यांश: शिक्षा व्यक्ति और समाज दोनों के विकास के लिए अनिवार्य है। अज्ञान के अंधकार में जीना तो मृत्यु से भी अधिक कष्टकारी है। ज्ञान के प्रकाश में ही जीवन के रहस्य खुलते हैं और हमें अपनी पहिचान मिलती है। शिक्षा मनुष्य को मष्तिष्क और देह का उचित प्रयोग करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्यपुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिन्तन न दे व्यर्थ है। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सच्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ? संसार के सभी वैभव व सुख साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो।
(i) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।