Question:

पद्यांश: अलसता की सी लता
किंतु कोमलता की वह कली
सखी नीरवता के कंधे पर डाले बाँह
छाँह-सी अम्बर पथ से चली
नहीं बजती उसके हाथों में कोई वीणा,
नहीं होता कोई अनुराग-राग-आलाप,
नूपुरों में भी रुन झुन रुन झुन रुन झुन नहीं
सिर्फ एक अव्यक्त शब्द सा 'चुप-चुप-चुप'
है गूँज रहा सब कहीं।
(i) उपर्युक्त पद्यांश के कवि एवं पद्यांश का नाम लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: कवि का नाम:
इस पद्यांश के कवि छायावाद के प्रमुख स्तम्भ सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ हैं।

चरण 2: पद्यांश का नाम:
यह पद्यांश ‘संध्या-सुन्दरी’ शीर्षक कविता से लिया गया है। यह कविता निराला जी के काव्य-संग्रह ‘परिमल’ में संकलित है। इसमें कवि ने सायंकाल को एक कोमल सुन्दरी के रूप में चित्रित किया है।

अंतिम उत्तर:
कवि: सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’; पद्यांश की कविता: ‘संध्या-सुन्दरी’।
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