Question:

अपठित गद्यांश: जीवन में सफल वही है, जो उपयुक्त समय पर उपयुक्त चुनाव करना जानता है। कुछ चुनाव हमारे वश में नहीं हैं - जैसे माता-पिता का, जन्म-मृत्यु का। किन्तु कुछ हमारे वश में हैं जिन पर हमारी सफलता असफलता निर्भर है - जैसे संगति का चुनाव, आलस्य या परिश्रम का चुनाव आदि। संगति का चुनाव इन सब में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस चुनाव पर हमारा आचरण, कर्म, विचार, भाषा - स्तर, मनुष्यता और हमारी सफलता-असफलता निर्भर करती है। मनुष्य का चित्त बुराइयों की ओर जल्दी आकृष्ट हो जाता है। जिस प्रकार पानी सदैव नीचे की ओर बहता है, उसी प्रकार मनुष्य का मन भी बुराइयों की ओर शीघ्र भागता है। हम विवेक से काम लेकर अच्छे और बुरे का चुनाव कर सकते हैं और सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
(i) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: गद्यांश का केन्द्रीय भाव:
गद्यांश की शुरुआत में कहा गया है कि सफल वही है जो सही समय पर सही चुनाव करता है।
आगे बताया गया है कि माता-पिता और जन्म-मृत्यु का चुनाव हमारे वश में नहीं है, पर संगति, आलस्य या परिश्रम का चुनाव हमारे हाथ में है।
इनमें भी संगति का चुनाव सबसे अधिक महत्वपूर्ण बताया गया है, क्योंकि इसी पर आचरण, विचार और सफलता निर्भर करते हैं।

चरण 2: शीर्षक का चयन:
शीर्षक छोटा, सार्थक और पूरे गद्यांश का भाव बताने वाला होना चाहिए।
यहाँ पूरा गद्यांश सही चुनाव और विशेष रूप से संगति के चुनाव पर टिका है।

अंतिम उत्तर:
उचित शीर्षक: ‘चुनाव का महत्व’ (अन्य उपयुक्त शीर्षक: ‘संगति का प्रभाव’ या ‘सही चुनाव और सफलता’)।
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