Question:

पद्यांश: ज्यों ज्यों लगती नाव पार
उर में आलोकित शत विचार!
इस धरा सा ही जग का क्रम
शाश्वत इस जीवन का उद्गम
शाश्वत है गति, शाश्वत संगम
शाश्वत नभ का नीला विकास,
शाश्वत शशि का यह रजत हास,
शाश्वत लघु लहरों का विलास
हे जगजीवन के कर्णधार!
चिर जन्म मरण के आर-पार,
शाश्वत जीवन नौका विहार।
मैं भूल गया अस्तित्व ज्ञान,
जीवन का यह शाश्वत प्रमाण
करता मुझको अमरत्व दान!
(iv) रजत हास और कर्णधार का क्या अर्थ है?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: रजत हास का अर्थ:
‘रजत’ का अर्थ चाँदी है और ‘हास’ का अर्थ हँसी। रजत हास का अर्थ है चाँदी जैसी उजली हँसी। यहाँ यह चन्द्रमा की श्वेत चाँदनी के लिए आया है।

चरण 2: कर्णधार का अर्थ:
‘कर्णधार’ नाव का खेवैया या मल्लाह होता है, जो नाव को दिशा देता है। कविता में यह ईश्वर के लिए है, जो जगत और जीवन की नौका का संचालक है।

अंतिम उत्तर:
रजत हास: चाँदी-सी उजली हँसी (चाँदनी)। कर्णधार: नाव का खेवैया, यहाँ जीवन का संचालक ईश्वर।
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