List of top Questions asked in UP Board XII

निम्नलिखित गद्यांश के नीचे दिये गये प्रश्नों का उत्तर दीजिए।
भारत के अनेक महापुरुष, जिनकी भारतीय परम्परा और संस्कृति के प्रति अनन्य निष्ठा है, इन बुराइयों के विरुद्ध लड़े। आज के अनेक आर्थिक और सामाजिक विधानों की हम जाँच करें, तो पता चलेगा कि वे हमारी सांस्कृतिक चेतना के क्षीण होने के कारण युगानुकूल परिवर्तन और परिवर्धन की कमी से बनी हुई रूढ़ियाँ, परकियों के साथ संघर्ष की परिस्थिति से उत्पन्न माँग को पूरा करने के लिए अपनाए गए उपाय अथवा परकियों द्वारा थोपी गयी या उनका अनुकरण कर स्वीकार की गई व्यवस्थाएँ मात्र हैं। भारतीय संस्कृति के नाम पर उन्हें जिन्दा नहीं रखा जा सकता।

क) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ का नाम और लेखक का नाम लिखिए।
ख) कौन लोग बुराइयों के प्रति लड़े थे?
ग) संस्कृति के क्षीण होने का क्या प्रभाव पड़ा है?
घ) युगानुकूल परिवर्तन पर रूढ़ियाँ कैसे प्रभावी रहीं?
ङ) भारतीय संस्कृति के नाम पर किसे जिन्दा नहीं रखा जा सकता?
निम्नलिखित गद्यांश के नीचे दिये गये प्रश्नों का उत्तर दीजिए।
पृथ्वी पर निवास करने वाले जनों का विस्तार अनंत है — नगर और जनपद, पुर और गाँव, जंगल और पर्वत, नाना प्रकार के जनों से भरे हुए हैं। ये जन अनेक प्रकार की भाषाएँ बोलनेवाले और अनेक धर्मों के माननेवाले हैं, फिर भी ये मातृभूमि के पुत्र हैं और इस कारण उनका सौहार्द भाव अखण्ड है। सभ्यता और रहन-सहन की दृष्टि से जन एक-दूसरे से आगे-पीछे हो सकते हैं, किन्तु इस कारण से मातृभूमि के साथ उनका जो सम्बन्ध है, उसमें कोई भेदभाव उत्पन्न नहीं हो सकता। पृथ्वी के विशाल प्रांगण में सब जातियों के लिए समान क्षेत्र है।

क) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम लिखिए।
ख) पृथ्वी पर रहनेवाले कहाँ भरे हुए हैं?
ग) लेखक ने मातृभूमि का पुत्र किसे कहा है?
घ) मातृभूमि को लेकर किसमें भेदभाव नहीं है?
ङ) सब जातियों के लिए कौनसा क्षेत्र समान है?