निम्नलिखित गद्यांश के नीचे दिये गये प्रश्नों का उत्तर दीजिए।
पृथ्वी पर निवास करने वाले जनों का विस्तार अनंत है — नगर और जनपद, पुर और गाँव, जंगल और पर्वत, नाना प्रकार के जनों से भरे हुए हैं। ये जन अनेक प्रकार की भाषाएँ बोलनेवाले और अनेक धर्मों के माननेवाले हैं, फिर भी ये मातृभूमि के पुत्र हैं और इस कारण उनका सौहार्द भाव अखण्ड है। सभ्यता और रहन-सहन की दृष्टि से जन एक-दूसरे से आगे-पीछे हो सकते हैं, किन्तु इस कारण से मातृभूमि के साथ उनका जो सम्बन्ध है, उसमें कोई भेदभाव उत्पन्न नहीं हो सकता। पृथ्वी के विशाल प्रांगण में सब जातियों के लिए समान क्षेत्र है।
क) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम लिखिए।
ख) पृथ्वी पर रहनेवाले कहाँ भरे हुए हैं?
ग) लेखक ने मातृभूमि का पुत्र किसे कहा है?
घ) मातृभूमि को लेकर किसमें भेदभाव नहीं है?
ङ) सब जातियों के लिए कौनसा क्षेत्र समान है?