Question:

निम्नलिखित श्लोकों का ससंदर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
ज्ञाने मौनं क्षमा शक्तौ त्यागे श्लाघाविपर्ययः। गुणा गुणानुबन्धित्वात् तस्य सत्प्रसवा इव॥

Updated On: Sep 23, 2026
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Solution and Explanation

संदर्भ: यह श्लोक श्रेष्ठ पुरुषों के गुणों की परस्पर श्रृंखला-बद्धता को दर्शाता है।
हिन्दी अनुवाद: ज्ञान होने पर भी मौन (विनम्रता) रखना, शक्ति (सामर्थ्य) होने पर भी क्षमा करना, और त्याग करने पर भी प्रशंसा की इच्छा न रखना — ये सभी गुण एक-दूसरे से जुड़े हुए होते हैं, मानो एक ही सद्गुण-रूपी वृक्ष की उत्तम सन्ततियाँ हों।
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