Question:

निम्नलिखित गद्यांश के नीचे दिये गये प्रश्नों का उत्तर दीजिए।
पृथ्वी पर निवास करने वाले जनों का विस्तार अनंत है — नगर और जनपद, पुर और गाँव, जंगल और पर्वत, नाना प्रकार के जनों से भरे हुए हैं। ये जन अनेक प्रकार की भाषाएँ बोलनेवाले और अनेक धर्मों के माननेवाले हैं, फिर भी ये मातृभूमि के पुत्र हैं और इस कारण उनका सौहार्द भाव अखण्ड है। सभ्यता और रहन-सहन की दृष्टि से जन एक-दूसरे से आगे-पीछे हो सकते हैं, किन्तु इस कारण से मातृभूमि के साथ उनका जो सम्बन्ध है, उसमें कोई भेदभाव उत्पन्न नहीं हो सकता। पृथ्वी के विशाल प्रांगण में सब जातियों के लिए समान क्षेत्र है।

क) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम लिखिए।
ख) पृथ्वी पर रहनेवाले कहाँ भरे हुए हैं?
ग) लेखक ने मातृभूमि का पुत्र किसे कहा है?
घ) मातृभूमि को लेकर किसमें भेदभाव नहीं है?
ङ) सब जातियों के लिए कौनसा क्षेत्र समान है?

Updated On: Sep 23, 2026
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Solution and Explanation

क) यह गद्यांश राष्ट्र और मातृभूमि की एकता पर आधारित एक निबन्ध का अंश है; भाषा-शैली व विषयवस्तु के आधार पर यह राष्ट्रीय-चेतना सम्बन्धी निबन्ध-परम्परा की रचना प्रतीत होती है — मूल पाठ्यपुस्तक से सटीक शीर्षक व लेखक-नाम की पुष्टि प्रामाणिक प्रति से करें।
ख) पृथ्वी पर रहनेवाले जन नगर और जनपद, पुर और गाँव, जंगल और पर्वत — इन सब में नाना प्रकार से भरे हुए हैं।
ग) लेखक ने विभिन्न भाषाएँ बोलने वाले और विभिन्न धर्मों को माननेवाले सभी जनों को मातृभूमि का पुत्र कहा है, क्योंकि वे सब एक ही मातृभूमि से जुड़े हैं।
घ) सभ्यता और रहन-सहन में जन एक-दूसरे से आगे-पीछे भले हों, किन्तु मातृभूमि के साथ उनके सम्बन्ध में कोई भेदभाव नहीं है।
ङ) पृथ्वी के विशाल प्रांगण में सब जातियों के लिए समान क्षेत्र है — अर्थात मातृभूमि पर सबका समान अधिकार है।
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