Question:

निम्नलिखित गद्यांश के नीचे दिये गये प्रश्नों का उत्तर दीजिए।
भारत के अनेक महापुरुष, जिनकी भारतीय परम्परा और संस्कृति के प्रति अनन्य निष्ठा है, इन बुराइयों के विरुद्ध लड़े। आज के अनेक आर्थिक और सामाजिक विधानों की हम जाँच करें, तो पता चलेगा कि वे हमारी सांस्कृतिक चेतना के क्षीण होने के कारण युगानुकूल परिवर्तन और परिवर्धन की कमी से बनी हुई रूढ़ियाँ, परकियों के साथ संघर्ष की परिस्थिति से उत्पन्न माँग को पूरा करने के लिए अपनाए गए उपाय अथवा परकियों द्वारा थोपी गयी या उनका अनुकरण कर स्वीकार की गई व्यवस्थाएँ मात्र हैं। भारतीय संस्कृति के नाम पर उन्हें जिन्दा नहीं रखा जा सकता।

क) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ का नाम और लेखक का नाम लिखिए।
ख) कौन लोग बुराइयों के प्रति लड़े थे?
ग) संस्कृति के क्षीण होने का क्या प्रभाव पड़ा है?
घ) युगानुकूल परिवर्तन पर रूढ़ियाँ कैसे प्रभावी रहीं?
ङ) भारतीय संस्कृति के नाम पर किसे जिन्दा नहीं रखा जा सकता?

Updated On: Sep 23, 2026
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Solution and Explanation

क) यह गद्यांश भारतीय संस्कृति के सतत मूल्यांकन और रूढ़ियों की समीक्षा पर आधारित एक सांस्कृतिक-चिन्तन निबन्ध का अंश है — मूल शीर्षक/लेखक-नाम पाठ्यपुस्तक की प्रामाणिक प्रति से सत्यापित करें।
ख) भारत के वे अनेक महापुरुष जिनकी भारतीय परम्परा और संस्कृति के प्रति अनन्य निष्ठा थी, वे इन बुराइयों के विरुद्ध लड़े।
ग) संस्कृति के क्षीण होने से हमारी सांस्कृतिक चेतना कमजोर हुई, जिसके कारण युगानुकूल परिवर्तन व परिवर्धन का अभाव होने से पुरानी रूढ़ियाँ बनी रहीं।
घ) युगानुकूल परिवर्तन एवं परिवर्धन की कमी के कारण ही रूढ़ियाँ मजबूती से बनी रहीं और परिस्थितियों के अनुरूप न बदल सकीं।
ङ) परकियों के संघर्ष से उत्पन्न माँग पूरी करने हेतु अपनाए गए उपाय, या परकियों द्वारा थोपी गयी अथवा उनका अनुकरण कर स्वीकार की गई व्यवस्थाओं को भारतीय संस्कृति के नाम पर जिन्दा नहीं रखा जा सकता।
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