Question:

निम्नलिखित पद्यांशों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
बरस तू बरस-बरस रसधार। पार ले चल तू मुझको, बहा, दिखा मुझको भी निज गर्जन-भैरव-संसार। उथल-पुथल कर हृदय मचा हलचल। चल रे चल, मेरे पागल बादल।

क) प्रस्तुत पद्यांश के कविता का शीर्षक और रचयिता का नाम लिखिए।
ख) किसे पार ले जाने की बात कवि करता है?
ग) 'गर्जन-भैरव-संसार' से कवि का क्या आशय है?
घ) हृदय में उथल-पुथल क्यों होता है?
ङ) 'मचा हलचल' — बादल से कवि का क्या आशय है?

Updated On: Sep 23, 2026
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Solution and Explanation

क) यह प्रगतिवादी/प्रयोगवादी शैली की गतिशील स्वच्छंद कविता है, 'पागल बादल' के सम्बोधन व लघु-पंक्ति शिल्प के आधार पर — शीर्षक व रचयिता-नाम पाठ्यपुस्तक से सत्यापित करें।
ख) कवि स्वयं को पागल बादल के सहारे रसधार में बहाकर पार ले जाने की बात करता है — वह बादल की तीव्र, उन्मुक्त गति में अपने बन्धनों से मुक्त होना चाहता है।
ग) 'गर्जन-भैरव-संसार' से आशय है वह भयंकर, गरजता हुआ प्रचण्ड संसार जिसे बादल की गर्जना के माध्यम से कवि प्रत्यक्ष अनुभव करना चाहता है — अर्थात प्रकृति के विराट, उग्र रूप का साक्षात्कार।
घ) हृदय में उथल-पुथल इसलिए होता है क्योंकि बादल की गर्जना और वर्षा की तीव्रता कवि के भीतर की बेचैनी, आवेग और मुक्ति की छटपटाहट को झकझोर देती है।
ङ) 'मचा हलचल' से कवि का आशय है कि बादल अपनी उन्मुक्त, उद्दाम गति से सम्पूर्ण वातावरण में हलचल मचा दे — वह बादल को स्थिर नहीं, बल्कि निरन्तर गतिशील देखना चाहता है, इसीलिए 'चल रे चल' कहकर पुकारता है।
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