Question:

निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश का संदर्भसहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
संस्कृतसाहित्यस्य आदिकविः वाल्मीकिः, महर्षिव्यासः, कविकुलगुरुः कालिदासः अन्ये च भास-भारवि-भवभूत्यादयो महाकवयः स्वकीयैः ग्रन्थरत्नैः अद्यापि पाठकानां हृदि विराजन्ते। इयं भाषा अस्माभिः मातृसमं सम्माननीया वन्दनीया च, यतो भारतमातुः स्वातन्त्र्यं, गौरवम्, अखण्डत्वं सांस्कृतिकमेकत्वञ्च संस्कृतेनैव सुरक्षितुं शक्यन्ते। इयं संस्कृतभाषा सर्वासु भाषासु प्राचीनतमा श्रेष्ठा चास्ति। ततः सुसूक्तम् 'भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाणभारती' इति।

Updated On: Sep 23, 2026
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Solution and Explanation

संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश संस्कृत भाषा के गौरव एवं उसके प्राचीन महाकवियों के अवदान का वर्णन करता है।
हिन्दी अनुवाद: संस्कृत साहित्य के आदिकवि वाल्मीकि, महर्षि व्यास, कविकुल के गुरु कालिदास तथा भास, भारवि, भवभूति आदि अन्य महाकवि अपने श्रेष्ठ ग्रन्थ-रत्नों के द्वारा आज भी पाठकों के हृदय में विराजमान हैं। यह भाषा हमारे द्वारा माता के समान सम्माननीय और वन्दनीय है, क्योंकि भारतमाता की स्वतन्त्रता, गौरव, अखण्डता और सांस्कृतिक एकता संस्कृत के द्वारा ही सुरक्षित रखी जा सकती है। यह संस्कृत भाषा सभी भाषाओं में सबसे प्राचीन और श्रेष्ठ है। इसीलिए यह सुन्दर कथन कहा गया है — 'सभी भाषाओं में मुख्य, मधुर और दिव्य देवभाषा (संस्कृत) ही है'।
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