Question:

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए :

‘बाज़ार दर्शन’ पाठ के आधार पर लिखिए कि बाज़ार का वह कौन-सा रूप है जिसका पोषण करने वाला शास्त्र अर्थशास्त्र न होकर नीतिशास्त्र है ? और क्यों ?

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लेखक ने बाज़ारूपन, कपट और शोषण वाले बाज़ार के पोषक शास्त्र को 'मायावी' और 'अनीति-शास्त्र' कहा है। इसी पर ध्यान दीजिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
'बाज़ार दर्शन' जैनेंद्र कुमार का निबंध (आरोह) है। इसमें लेखक बाज़ार के सही और गलत रूप की चर्चा करता है।

चरण 2: बाज़ार का वह रूप:
लेखक बताता है कि जब बाज़ार केवल माल बेचने और मुनाफ़ा कमाने का साधन बन जाता है, तो उसमें बाज़ारूपन आ जाता है।
ऐसे बाज़ार में ग्राहक को ललचाया जाता है, अनावश्यक वस्तुएँ खरीदने को उकसाया जाता है, कपट और शोषण बढ़ता है तथा ग्राहक और दुकानदार के बीच सद्भाव समाप्त हो जाता है।

चरण 3: शास्त्र और कारण:
लेखक के अनुसार ऐसे बाज़ार का पोषण करने वाला अर्थशास्त्र सरासर औंधा है, वह मायावी शास्त्र है; वह अर्थशास्त्र नहीं बल्कि अनीति-शास्त्र है।
कारण यह है कि वह मनुष्य की आवश्यकता पूरी करने के बजाय उसका शोषण करता है, जबकि सच्चा अर्थशास्त्र मानव-कल्याण के लिए होना चाहिए।

अंतिम उत्तर:
कपट, लालच और शोषण पर टिका बाज़ारू बाज़ार ही वह रूप है; उसका पोषण करने वाला शास्त्र अर्थशास्त्र न होकर (अ)नीति-शास्त्र है, क्योंकि वह आवश्यकता नहीं, शोषण को बढ़ाता है।
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