Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :

“बाज़ार एक प्रकार से सामाजिक समता की भी रचना कर रहा है।” ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

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बाज़ार में सब लोग केवल ग्राहक होते हैं और जाति-धर्म का भेद नहीं रहता। यही सामाजिक समता है।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
‘बाज़ार दर्शन’ जैनेंद्र कुमार का निबंध है, जो ‘आरोह भाग 2’ में है। इसमें लेखक ने बाज़ार के प्रभाव और उसकी सच्ची सार्थकता पर विचार किया है। प्रश्न की पंक्ति इसी निबंध से ली गई है।

चरण 2: कथन का अर्थ:
लेखक के अनुसार बाज़ार में जाने वाले सब लोग ग्राहक होते हैं। वहाँ कोई ऊँचा-नीचा, अमीर-गरीब, जाति या धर्म देखकर व्यवहार नहीं करता। बाज़ार केवल क्रेता और विक्रेता का संबंध जानता है।

चरण 3: समता कैसे बनती है:
बाज़ार सबको एक जैसे अवसर से बुलाता है। जो भी अपनी ज़रूरत का सामान खरीद सकता है, वहाँ उसका बराबर स्वागत है। इससे समाज में भेदभाव की दीवारें कमज़ोर पड़ती हैं। लेकिन यह तभी सार्थक है जब मनुष्य अपनी वास्तविक आवश्यकता पहचानकर खरीदारी करे और दिखावे या फ़िज़ूलखर्ची में न पड़े।

चरण 4: उत्तर (लगभग 60 शब्द):
लेखक के अनुसार बाज़ार में सब लोग केवल ग्राहक होते हैं, चाहे उनकी जाति, धर्म या हैसियत कुछ भी हो। बाज़ार सबका एक समान स्वागत करता है और व्यक्ति की पहचान उसकी ज़रूरत तथा क्रय-शक्ति से होती है। इस प्रकार वहाँ ऊँच-नीच का भेद मिट जाता है और सामाजिक समता की रचना होती है।

अंतिम उत्तर:
बाज़ार में सब ग्राहक के रूप में बराबर माने जाते हैं, इसलिए वह सामाजिक समता की रचना करता है।
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