Question:

काव्य-खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए :

“मैं भव मौजों पर मस्त बहा करता हूँ” ‘आत्मपरिचय’ कविता से उद्धृत इस पंक्ति का क्या आशय है ?

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इससे पहले की पंक्ति 'जग भव-सागर तरने को नाव बनाए' से कवि और संसार के लोगों की तुलना कीजिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
यह पंक्ति हरिवंशराय बच्चन की कविता 'आत्म-परिचय' (आरोह भाग 2) से ली गई है।
इस कविता में कवि संसार के साथ अपने संबंध का परिचय देता है।
पंक्ति से ठीक पहले कवि कहता है - 'जग भव-सागर तरने को नाव बनाए', अर्थात संसार के लोग इस भव-सागर को पार करने के लिए नाव बनाते हैं।

चरण 2: शब्दों का अर्थ:
'भव' का अर्थ है संसार और 'मौजें' का अर्थ है लहरें।
'भव-मौजें' यानी संसार के सुख-दुख और जीवन के उतार-चढ़ाव।

चरण 3: आशय:
लोग संसार रूपी सागर से डरकर उससे पार निकल जाने के उपाय करते हैं।
पर कवि उससे भागता नहीं, वह उन्हीं लहरों पर मस्ती से बहता रहता है।
उसी छंद में कवि कहता है कि वह सुख-दुख दोनों में मग्न रहता है, यानी वह दोनों को सहज भाव से स्वीकार करता है।
इससे कवि का निश्चिंत, निर्भय और मस्तमौला स्वभाव प्रकट होता है।

अंतिम उत्तर:
जहाँ संसार के लोग भव-सागर को पार करने के लिए नाव बनाते हैं, वहाँ कवि संसार के सुख-दुख रूपी लहरों से घबराए बिना उन पर मस्ती से बहता है; यानी वह जीवन को डर से नहीं, आनंद और सहजता से जीता है।
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