Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए :

‘आत्मपरिचय’ का कवि अपने किस सीखे हुए ज्ञान को भूलना चाहता है और क्यों ?

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पंक्ति याद कीजिए: मैं सीख रहा हूँ, सीखा ज्ञान भुलाना। कारण पिछली पंक्तियों में है: यत्न करके भी कोई सत्य नहीं जान सका और जहाँ दाना है वहीं नादान भी है।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
‘आत्मपरिचय’ हरिवंशराय बच्चन की कविता है, जो ‘आरोह भाग-2’ में है। इसमें कवि अपने और संसार के संबंध को बताता है और कहता है: मैं और, और जग और, कहाँ का नाता।

चरण 2: कौन-सा ज्ञान:
कवि कहता है: मैं सीख रहा हूँ, सीखा ज्ञान भुलाना। अर्थात वह संसार से और पुस्तकों से सीखा हुआ ज्ञान भूलना चाहता है, जिसके बल पर दुनिया अपने को समझदार मानती है।

चरण 3: कारण:
इससे पहले की पंक्तियाँ हैं: कर यत्न मिटे सब, सत्य किसी ने जाना? नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना! अर्थात सत्य को जानने का यत्न करते-करते सब मिट गए, पर सत्य कोई नहीं जान सका। जहाँ ज्ञानी हैं, वहीं नादान भी हैं। फिर भी जो संसार यही ज्ञान सीखता रहता है, वह मूर्ख ही है। इसलिए कवि यह ज्ञान भुलाकर प्रेम और भावना का मार्ग अपनाना चाहता है।

चरण 4: आदर्श उत्तर (लगभग 40 शब्द):
कवि संसार से सीखा हुआ ज्ञान भूलना चाहता है, क्योंकि इस ज्ञान से कोई सत्य नहीं जान सका। सब यत्न करते-करते मिट गए और जहाँ ज्ञानी हैं वहीं नादान भी हैं। ऐसा ज्ञान व्यर्थ है, इसलिए कवि प्रेम और मस्ती का मार्ग चुनता है।

अंतिम उत्तर:
कवि सांसारिक, सीखा हुआ ज्ञान भूलना चाहता है, क्योंकि उससे सत्य नहीं मिलता।
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