Question:

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए :

“मन लक्ष्य से भरा हो तो बाजार भी फैला का फैला ही रह जाएगा।” ‘बाजार दर्शन’ पाठ के संदर्भ में इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

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सोचिए कि जिसे अपनी ज़रूरत पता हो, उस पर बाज़ार की चमक-दमक का क्या असर होता है। भगत जी का उदाहरण याद कीजिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: पाठ और लेखक का संदर्भ:
'बाज़ार दर्शन' जैनेंद्र कुमार का विचारप्रधान निबंध है।
इसमें लेखक बताते हैं कि बाज़ार का जादू किस पर चलता है और किस पर नहीं।
लेखक के अनुसार बाज़ार का जादू आँख की राह से काम करता है।

चरण 2: 'मन लक्ष्य से भरा हो' का अर्थ:
जिस व्यक्ति के मन में यह स्पष्ट है कि उसे क्या चाहिए, उसका मन लक्ष्य से भरा होता है।
ऐसा व्यक्ति केवल अपनी आवश्यकता की वस्तु लेने बाज़ार जाता है।
वह चमक-दमक और दिखावे के आकर्षण में नहीं फँसता।

चरण 3: 'बाज़ार फैला का फैला रह जाना' का आशय:
ऐसे व्यक्ति के सामने बाज़ार का सारा आकर्षण बेकार हो जाता है।
बाज़ार उसे लुभा नहीं पाता और वह अपनी ज़रूरत की चीज़ लेकर लौट आता है।
पाठ में भगत जी इसका उदाहरण हैं, जो चौक बाज़ार से गुज़रकर भी केवल पंसारी की दुकान से काला नमक और ज़ीरा लेते हैं।

चरण 4: इसके विपरीत स्थिति:
जिसका मन खाली होता है, अर्थात जिसे यह पता नहीं कि उसे क्या चाहिए, उस पर बाज़ार का जादू चल जाता है।
वह अनावश्यक वस्तुएँ खरीद लेता है और बाद में पछताता है।

अंतिम उत्तर:
आशय यह है कि जो व्यक्ति अपनी आवश्यकता और लक्ष्य को जानता है, उस पर बाज़ार का आकर्षण असर नहीं करता, बाज़ार अपनी पूरी चमक के साथ फैला रहता है पर उसे फँसा नहीं पाता।
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