Question:

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में दीजिए :

‘बाज़ार दर्शन’ पाठ में छल-कपट से परिपूर्ण बाज़ार का पोषण करने वाले अर्थशास्त्र के लिए प्रयुक्त दो विशेषणों का औचित्य स्पष्ट कीजिए।

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लेखक ने ऐसे अर्थशास्त्र को माया और अनीति से जोड़ा है, इन शब्दों का अर्थ सोचिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: पाठ का प्रसंग:
‘बाज़ार दर्शन’ जैनेंद्र कुमार का निबंध है। इसमें लेखक बाज़ार के सही और गलत उपयोग पर विचार करते हैं।
लेखक के अनुसार जो बाज़ार छल-कपट और शोषण बढ़ाता है, उसे पोषण देने वाला अर्थशास्त्र गलत है।

चरण 2: दो विशेषण और औचित्य:
लेखक ऐसे अर्थशास्त्र को ‘मायावी शास्त्र’ और ‘अनीति-शास्त्र’ कहते हैं (साथ ही उसे ‘औंधा’ भी कहा गया है)।
‘मायावी’ इसलिए, क्योंकि वह आकर्षण और दिखावे से ग्राहक को भ्रम में डालकर अनावश्यक चीज़ें खरीदवाता है।
‘अनीति-शास्त्र’ इसलिए, क्योंकि वह नैतिकता छोड़कर केवल मुनाफ़े और शोषण को बढ़ाता है, जिससे सद्भाव नष्ट होता है।

अंतिम उत्तर:
छल-कपट वाले बाज़ार के अर्थशास्त्र को ‘मायावी’ और ‘अनीति-शास्त्र’ कहना उचित है, क्योंकि वह भ्रम फैलाता है और नैतिकता के विरुद्ध शोषण करता है।
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