Question:

काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में दीजिए :

‘हो जाए न पथ में रात कहीं’ – इस काव्य पंक्ति में कवि ने किस पथ की ओर संकेत किया है ? कवि ने ‘रात’ शब्द का प्रयोग करके कौन-सी आशंका व्यक्त की है ?

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थके पथिक की मंज़िल और समय के ढलने को ध्यान में रखिए। ‘रात’ को अंधकार और अंत का प्रतीक मानकर सोचिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
यह पंक्ति हरिवंशराय बच्चन के ‘एक गीत’ (दिन जल्दी-जल्दी ढलता है) से ली गई है, जो ‘आरोह’ भाग 2 में संकलित है।
दिन भर का थका पथिक यह सोचकर जल्दी-जल्दी चलता है कि कहीं रास्ते में ही रात न हो जाए, क्योंकि मंज़िल अब दूर नहीं है।

चरण 2: किस पथ की ओर संकेत:
कवि ने पथिक के उस रास्ते की ओर संकेत किया है जो उसे अपनी मंज़िल, अपने घर और अपनों तक ले जाता है।
गहरे अर्थ में यह मनुष्य का जीवन-पथ है, जिस पर चलकर वह अपने लक्ष्य तक पहुँचना चाहता है।

चरण 3: ‘रात’ से व्यक्त आशंका:
‘रात’ अंधकार, बाधा और जीवन के अंत का प्रतीक है।
कवि को आशंका है कि कहीं मंज़िल तक पहुँचने से पहले ही रात न घिर आए, यानी लक्ष्य पाने से पहले समय समाप्त न हो जाए।

अंतिम उत्तर:
कवि ने मंज़िल की ओर जाने वाले जीवन-पथ की ओर संकेत किया है; ‘रात’ शब्द से यह आशंका व्यक्त की है कि लक्ष्य तक पहुँचने से पहले ही अंधकार (समय का अंत) न आ जाए।
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