Question:

'करुण' अथवा 'हास्य' रस का परिभाषासहित उदाहरण लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
Show Solution
collegedunia
Verified By Collegedunia

Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न का चुनाव:
प्रश्न में ‘करुण’ अथवा ‘हास्य’ में से एक रस लिखना है। यहाँ पहला रस ‘करुण रस’ लिखा गया है।

चरण 2: परिभाषा:
जब किसी प्रिय व्यक्ति के वियोग, मृत्यु या अनिष्ट के वर्णन से हृदय में शोक का भाव जागता है और वह विभाव, अनुभाव तथा संचारी भावों से पुष्ट होकर आनन्द की अनुभूति कराता है, तब करुण रस होता है।
इसका स्थायी भाव ‘शोक’ है।

चरण 3: उदाहरण:
दुख ही जीवन की कथा रही,
क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!
(सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’, सरोज स्मृति)

चरण 4: रस-निरूपण:
स्थायी भाव: शोक।
आलम्बन: पुत्री सरोज की मृत्यु।
आश्रय: कवि स्वयं।
अनुभाव: अपने दुख को कहने की पीड़ा, आत्मग्लानि।
संचारी भाव: स्मृति, विषाद, दैन्य।
इन सबसे शोक भाव पुष्ट होता है, इसलिए यहाँ करुण रस है।

निष्कर्ष:
शोक स्थायी भाव वाला रस करुण रस है और ऊपर की पंक्तियाँ उसका उदाहरण हैं।
Was this answer helpful?
0
0