Question:

निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर अपनी भाषा-शैली में निबन्ध लिखिए: विद्यार्थी-जीवन में अनुशासन का महत्व

Updated On: Sep 24, 2026
Show Solution
collegedunia
Verified By Collegedunia

Solution and Explanation

चरण 1: रूपरेखा:
1. प्रस्तावना
2. अनुशासन का अर्थ
3. विद्यार्थी-जीवन में अनुशासन का महत्व
4. अनुशासनहीनता के कारण
5. अनुशासन कैसे आए
6. उपसंहार

चरण 2: निबन्ध, विद्यार्थी-जीवन में अनुशासन का महत्व:
प्रस्तावना:
जीवन की हर सफलता के पीछे कोई न कोई नियम काम करता है। सूर्य समय पर उगता है, ऋतुएँ क्रम से आती हैं और नदियाँ अपने मार्ग पर बहती हैं। यही प्रकृति का अनुशासन है। मनुष्य भी यदि नियमों में बँधकर चले तो उसका जीवन सुन्दर और सफल बन जाता है। विद्यार्थी-जीवन तो भविष्य की नींव है, इसलिए इस काल में अनुशासन सबसे आवश्यक है।

अनुशासन का अर्थ:
अनुशासन शब्द अनु और शासन से बना है, जिसका अर्थ है नियमों के अनुसार चलना। अपने बड़ों की आज्ञा मानना, समय का पालन करना, विद्यालय के नियमों को अपनाना और स्वयं पर नियन्त्रण रखना, ये सब अनुशासन के रूप हैं। सच्चा अनुशासन डर से नहीं, समझ और आदत से आता है।

विद्यार्थी-जीवन में महत्व:
विद्यार्थी-काल में जो आदतें बन जाती हैं, वे जीवन भर साथ रहती हैं। समय पर पढ़ना, नियमित अभ्यास और नियमित दिनचर्या से पढ़ाई में सफलता मिलती है। अनुशासित विद्यार्थी अपने शिक्षकों और माता-पिता का प्रिय होता है। उसमें विनम्रता, सहनशीलता और आत्मविश्वास बढ़ता है। कहा भी गया है, विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्। विनय अनुशासन से ही आती है। महात्मा गाँधी और डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम जैसे महापुरुषों ने अपने नियमित और संयमित जीवन से ही ऊँचाई पाई।

अनुशासनहीनता के कारण:
आज अनुशासनहीनता बढ़ती दिखाई देती है। इसके कारण हैं घर में संस्कारों की कमी, दोषपूर्ण शिक्षा-पद्धति, मोबाइल और टेलीविजन का अनुचित प्रयोग, बुरी संगति और परीक्षा का अत्यधिक दबाव। कई बार बड़े स्वयं अच्छा उदाहरण नहीं रखते, तब बच्चे भी वैसा ही सीखते हैं।

अनुशासन कैसे आए:
माता-पिता और शिक्षक पहले स्वयं आदर्श बनें। विद्यालयों में खेलकूद, एन.सी.सी., स्काउट और सांस्कृतिक गतिविधियाँ कराई जाएँ। विद्यार्थी दिनचर्या बनाकर उसका पालन करें और मोबाइल का सीमित प्रयोग करें। प्रेम और समझ के साथ दिया गया दण्ड भी अनुशासन सिखाता है।

उपसंहार:
अनुशासन सफलता की पहली सीढ़ी है। जो विद्यार्थी आज नियमों को अपनाएगा, वही कल देश का जिम्मेदार नागरिक बनेगा। इसलिए हर विद्यार्थी को अनुशासन को बोझ नहीं, अपना सबसे बड़ा साथी समझना चाहिए।

निष्कर्ष:
अनुशासित विद्यार्थी ही सुयोग्य नागरिक और उज्ज्वल भविष्य का निर्माता बनता है।
Was this answer helpful?
0
0