Question:

मुअनजो-दड़ो के मिले अवशेषों में अपने मूल स्वरूप के नजदीक बचे निर्माण के रूप में है –

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उस निर्माण को याद कीजिए जिसकी सीढ़ियाँ, तल और नालियाँ आज भी साफ दिखती हैं।
  • महाकुंड
  • गढ़
  • बौद्ध स्तूप
  • उपासना केंद्र
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग समझिए:
‘अतीत में दबे पाँव’ (वितान भाग 2) में ओम थानवी मुअनजो-दड़ो के खंडहरों की यात्रा का वर्णन करते हैं।
वहाँ की अधिकतर इमारतें समय के साथ टूट चुकी हैं और केवल उनकी नींव या दीवारें बची हैं।

चरण 2: महाकुंड की विशेषता:
लेखक के अनुसार वहाँ के निर्माणों में अनुष्ठानिक महाकुंड ही अपने मूल स्वरूप के बहुत निकट दिखाई देता है।
उसकी सीढ़ियाँ, पक्की ईंटों का तल और पानी निकालने की नालियाँ आज भी पहचानी जा सकती हैं।

चरण 3: अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
‘गढ़’ किसी एक इमारत का नहीं, बल्कि नगर के ऊँचे और खास हिस्से का नाम है।
बौद्ध स्तूप सबसे ऊँचे चबूतरे पर है, पर वह अब टीला मात्र रह गया है।
उपासना केंद्र को पाठ में मूल स्वरूप के निकट बचा निर्माण नहीं बताया गया है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 1 – महाकुंड।
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