चरण 1: प्रश्न को समझना:
यह प्रश्न ओम थानवी के पाठ ‘अतीत में दबे पाँव’ से है। तीन में से किन्हीं दो के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखने हैं, यह तीसरा उपभाग है। इसमें मुअनजो-दड़ो की नगर-योजना और लेखक द्वारा की गई आज के नगरों से उसकी तुलना बतानी है।
चरण 2: मुअनजो-दड़ो की नगर-योजना:
लेखक कहता है कि नगर नियोजन की मुअनजो-दड़ो अनूठी मिसाल है। यहाँ की लगभग सारी सड़कें सीधी हैं या फिर आड़ी, जिसे आज वास्तुकार ‘ग्रिड प्लान’ कहते हैं। मुख्य सड़क तैंतीस फुट चौड़ी है, जिस पर दो बैलगाड़ियाँ एक साथ आ-जा सकती हैं। कोई घर मुख्य सड़क पर नहीं खुलता, दरवाज़े भीतर की गलियों में हैं। ढकी हुई नालियाँ हैं, हर घर में स्नानघर है और लगभग सात सौ कुएँ थे।
चरण 3: आज के नगरों से तुलना:
लेखक के अनुसार आज की सेक्टर-मार्का कॉलोनियों में आड़ा-सीधा नियोजन बहुत मिलता है, पर वह रहन-सहन को नीरस बनाता है। आज शहरों में नियोजन के नाम पर अराजकता ज़्यादा मिलती है। चंडीगढ़, इस्लामाबाद और ब्रासीलिया ‘ग्रिड’ शैली के शहर हैं। चंडीगढ़ में कार्बूजिए ने पचास साल पहले ठीक वही शैली अपनाई कि कोई घर मुख्य सड़क पर नहीं खुलता। लेखक प्रश्न करता है कि क्या कार्बूजिए ने यह सीख मुअनजो-दड़ो से ली।
चरण 4: लगभग 100 शब्दों में आदर्श उत्तर:
लेखक ने मुअनजो-दड़ो को नगर नियोजन की अनूठी मिसाल बताया है। वहाँ की सड़कें सीधी या आड़ी हैं, जिसे आज ‘ग्रिड प्लान’ कहा जाता है। तैंतीस फुट चौड़ी मुख्य सड़क पर दो बैलगाड़ियाँ साथ चल सकती थीं। घरों के दरवाज़े मुख्य सड़क पर नहीं, गलियों में खुलते थे; नालियाँ ढकी थीं और हर घर में स्नानघर था। लेखक कहता है कि चंडीगढ़ में कार्बूजिए ने भी यही शैली अपनाई, जहाँ कोई घर मुख्य सड़क पर नहीं खुलता। पर आज की सेक्टर-मार्का कॉलोनियों का नियोजन जीवन को नीरस बनाता है और शहरों में नियोजन के नाम पर अराजकता अधिक है।
अंतिम उत्तर:
लेखक ने मुअनजो-दड़ो की ग्रिड योजना की तुलना चंडीगढ़ जैसे आधुनिक ग्रिड शहरों से की है और बताया है कि हजारों वर्ष पुराना यह नगर आज के कई नगरों से अधिक सुव्यवस्थित था।