Question:

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए :

‘मैं जिंदगी में कभी चित नहीं हुआ’ – पंक्ति में आए ‘चित’ शब्द का अर्थ स्पष्ट करते हुए, ‘पहलवान की ढोलक’ पाठ के आधार पर लिखिए कि लुट्टन ने इसका प्रयोग किस संदर्भ में किया है ?

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'चित' कुश्ती का शब्द है जिसका संबंध पीठ के ज़मीन से लगने से है। लुट्टन की अंतिम इच्छा याद कीजिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: पाठ का प्रसंग:
'पहलवान की ढोलक' फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी है।
इसका नायक लुट्टन पहलवान है, जिसने ढोल की आवाज़ को ही अपना गुरु माना था।
गाँव में महामारी के समय उसके दोनों बेटे मर गए और अंत में वह स्वयं भी मर गया।

चरण 2: 'चित' शब्द का अर्थ:
कुश्ती में 'चित होना' का अर्थ है पीठ का ज़मीन से लग जाना, अर्थात हार जाना।
जो पहलवान चित हो जाता है, वह कुश्ती हार जाता है।

चरण 3: प्रयोग का संदर्भ:
लुट्टन ने अपने शिष्यों से कहा था कि मरने के बाद उसे चिता पर पेट के बल सुलाया जाए, क्योंकि वह जिंदगी में कभी चित नहीं हुआ।
साथ ही उसने कहा था कि चिता सुलगाते समय ढोल अवश्य बजाया जाए।
इससे उसका पहलवानी पर गर्व और कभी हार न मानने वाला स्वभाव प्रकट होता है।

अंतिम उत्तर:
'चित' का अर्थ है पीठ ज़मीन से लगना यानी हारना; लुट्टन ने यह बात अपनी मृत्यु से पहले कही थी कि उसे चिता पर पेट के बल लिटाया जाए, क्योंकि वह जीवन में कभी चित (पराजित) नहीं हुआ।
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