Question:

काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :

तुलसी ने ‘कवितावली’ के छंदों में तत्कालीन आर्थिक विषमताओं का स्वाभाविक चित्रण किया है। सिद्ध कीजिए कि तुलसी युग चितेरे कवि थे।

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कवितावली के ‘पेट की आग’ और ‘खेती न किसान को’ वाले छंदों को याद कीजिए। उनमें दिखाई गई भूख और बेरोज़गारी से निष्कर्ष निकालिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
‘कवितावली’ गोस्वामी तुलसीदास की रचना है, जिसके कुछ छंद ‘आरोह’ भाग 2 में संकलित हैं।
इन छंदों में तुलसी ने अपने समय के समाज की आर्थिक दुर्दशा का यथार्थ चित्र खींचा है।

चरण 2: आर्थिक विषमता का चित्रण:
तुलसी बताते हैं कि किसान, व्यापारी, भिखारी, भाट, नौकर, नट और चोर - सभी पेट की आग बुझाने के लिए ऊँचे-नीचे कर्म करते हैं।
पेट के लिए लोग धर्म-अधर्म करते हैं, यहाँ तक कि अपने बेटा-बेटी तक बेच देते हैं; पेट की आग समुद्र की बड़वाग्नि से भी बड़ी है।
किसान को खेती नहीं, भिखारी को भीख नहीं, व्यापारी को व्यापार नहीं और नौकर को नौकरी नहीं मिलती; बेरोज़गार लोग एक-दूसरे से पूछते हैं - ‘कहाँ जाई, का करी?’

चरण 3: युग चितेरे कवि:
तुलसी ने गरीबी को रावण (दारिद-दसानन) कहा है, जिसने पूरी दुनिया को दबा रखा है।
भूख, बेरोज़गारी और लाचारी का ऐसा सजीव चित्रण सिद्ध करता है कि तुलसी अपने युग की वास्तविकता के सच्चे चित्रकार थे; आज भी ये समस्याएँ प्रासंगिक हैं।

अंतिम उत्तर:
कवितावली में भूख, बेरोज़गारी और गरीबी का यथार्थ चित्रण यह सिद्ध करता है कि तुलसी अपने समय के समाज के सच्चे और संवेदनशील चितेरे, अर्थात युग चितेरे कवि थे।
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