Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :

‘कवितावली’ में तुलसीदास जी ने पेट की आग की विशालता और भयावहता को किस प्रकार व्यक्त किया है ? स्पष्ट कीजिए।

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तुलसी ने पेट की आग को बड़वाग्नि से बड़ी कहा और सबके लिए ऊँचे-नीचे कर्म करने का चित्र खींचा।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग :
यह प्रश्न तुलसीदास की रचना ‘कवितावली’ (उत्तरकांड) के उस छंद पर आधारित है, जिसमें कवि ने कलियुग में पेट की भूख से परेशान सब वर्गों के लोगों का वर्णन किया है।

चरण 2: मुख्य बिंदु :
मज़दूर, किसान, व्यापारी, भिखारी, भाट, नौकर, नट, चोर और जादूगर सब पेट के लिए पढ़ते-गुनते, पहाड़ चढ़ते और जंगलों में शिकार को घूमते हैं। लोग ऊँचे-नीचे कर्म और धर्म-अधर्म करते हैं, यहाँ तक कि अपने बेटा-बेटी तक बेच देते हैं।

चरण 3: मॉडल उत्तर :
तुलसीदास ने बताया है कि सारे संसार के लोग पेट की आग बुझाने के लिए अच्छे-बुरे सब काम करते हैं, यहाँ तक कि संतान को भी बेच देते हैं। वे इस आग को समुद्र की बड़वाग्नि से भी बड़ी कहते हैं। इसे केवल श्रीराम रूपी घनश्याम (बादल) की कृपा का जल ही बुझा सकता है।

अंतिम उत्तर:
तुलसी के अनुसार पेट की आग बड़वाग्नि से भी बड़ी और भयावह है, जिसे केवल राम की कृपा बुझा सकती है।
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