Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए :

‘आत्मपरिचय’ कविता के आधार पर लिखिए कि जग की ओर ध्यान न देने वाला कवि जग-जीवन का भार लिए क्यों फिरता है ?

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सोचिए कि मनुष्य संसार की राय की उपेक्षा कर सकता है, पर क्या उसके दायित्वों से बच सकता है?
Updated On: Oct 31, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
'आत्मपरिचय' हरिवंशराय बच्चन की कविता है।
इसमें कवि अपने और संसार के संबंध को स्पष्ट करते हैं।
कवि कहते हैं कि वे जग की परवाह नहीं करते, फिर भी जग-जीवन का भार लिए फिरते हैं।

चरण 2: विरोधाभास का अर्थ:
कवि संसार की निंदा-प्रशंसा और उसकी स्वार्थी रीतियों की परवाह नहीं करते।
परंतु वे इसी संसार में रहते हैं, इसलिए जीवन की जिम्मेदारियों और सुख-दुख से मुक्त नहीं हो सकते।

चरण 3: आदर्श उत्तर (लगभग 60 शब्द):
कवि संसार के दिखावे, स्वार्थ और लोगों की राय की चिंता नहीं करते, इसलिए कहते हैं कि वे जग का ध्यान नहीं करते। फिर भी मनुष्य होने के नाते वे समाज से कटे हुए नहीं हैं। उन्हें जीवन के कर्तव्य, संघर्ष और दुख-सुख का भार उठाना ही पड़ता है। वे इस भार के साथ भी जीवन से प्रेम करते हैं और सबको प्रेम बाँटते हैं।

अंतिम उत्तर:
कवि जग की रीतियों की परवाह नहीं करते, पर समाज का अंग होने के कारण जीवन के कर्तव्यों और सुख-दुख का भार उठाते हुए प्रेमपूर्वक जीते हैं।
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