Question:

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में दीजिए :

‘पहलवान की ढोलक’ पाठ के आधार पर लिखिए कि बीमारी की विभीषिका से क्रंदन करता हुआ गाँव और अधिक भयावह रूप किन परिस्थितियों में ग्रहण कर लेता था ?

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कहानी के आरंभ में अमावस्या की रात के वर्णन को याद कीजिए। सूर्यास्त के बाद लोगों की दशा पर ध्यान दीजिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: पाठ और प्रसंग:
'पहलवान की ढोलक' फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी है।
कहानी के आरंभ में गाँव मलेरिया और हैजे से पीड़ित है और भयभीत बच्चे की तरह थर-थर काँप रहा है।

चरण 2: रात का भयावह वातावरण:
जाड़े का दिन और अमावस्या की ठंडी, काली रात थी।
टूटी-फूटी झोपड़ियों में अंधकार और सन्नाटे का साम्राज्य था।
सियारों का क्रंदन, पेचक (उल्लू) की डरावनी आवाज और कुत्तों का मिलकर रोना इस सन्नाटे को और डरावना बना देता था।

चरण 3: लोगों की दशा:
झोपड़ियों से कराहने और कै करने की आवाजें तथा 'हरे राम! हे भगवान!' की टेर सुनाई देती थी।
सूर्यास्त होते ही लोग घरों में घुसकर चुप हो जाते थे, माताएँ दम तोड़ते पुत्र को 'बेटा' कहकर पुकार भी नहीं पाती थीं।

अंतिम उत्तर:
सूर्यास्त के बाद जाड़े की अमावस्या की ठंडी काली रात, अंधकार और सन्नाटा, सियारों-उल्लुओं-कुत्तों की डरावनी आवाजें और रोगियों की कराह गाँव को और अधिक भयावह बना देती थीं।
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