Question:

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में दीजिए :

श्रम विभाजन और श्रमिक विभाजन का अंतर ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

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सोचिए कि 'काम का बँटवारा' और 'काम करने वालों का जन्म के आधार पर बँटवारा' में क्या अंतर है।
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Solution and Explanation

चरण 1: पाठ का संदर्भ:
'श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा' डॉ. भीमराव आंबेडकर का लेख है।
इसमें वे जाति-प्रथा को श्रम-विभाजन का रूप मानने वालों के तर्क का खंडन करते हैं।

चरण 2: श्रम-विभाजन:
श्रम-विभाजन का अर्थ है काम को योग्यता और रुचि के अनुसार बाँटना।
लेखक मानते हैं कि यह सभ्य समाज की आवश्यकता है और इससे कार्यकुशलता बढ़ती है।

चरण 3: श्रमिक-विभाजन:
जाति-प्रथा श्रम के साथ-साथ श्रमिकों को भी जन्म के आधार पर अलग-अलग वर्गों में बाँट देती है।
यह विभाजन अस्वाभाविक है, क्योंकि इसमें व्यक्ति की रुचि और क्षमता का ध्यान नहीं रखा जाता और वर्गों को ऊँच-नीच भी ठहराया जाता है।

अंतिम उत्तर:
श्रम-विभाजन योग्यता पर आधारित स्वाभाविक व्यवस्था है, जबकि श्रमिक-विभाजन जन्म पर आधारित ऊँच-नीच वाला अस्वाभाविक बँटवारा है, जो जाति-प्रथा करती है।
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