Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए :

“ ‘दासता’ केवल कानूनी पराधीनता को ही नहीं कहा जा सकता।” इस कथन के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने ‘मेरी कल्पना का आदर्श समाज’ में ‘दासता’ को किन व्यापक अर्थों में परिभाषित किया है ?

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दासता केवल कानूनी गुलामी नहीं है। दूसरों के थोपे कर्तव्य निभाने की मजबूरी भी दासता है।
Updated On: Oct 21, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न का स्वरूप:
किन्हीं दो उत्तर लिखने हैं। विद्यार्थी तीन में से अपनी पसंद के दो भाग चुनता है। यहाँ इस भाग का आदर्श उत्तर है, जो लगभग 40 शब्दों में है।

चरण 2: कथन का संदर्भ:
यह कथन डॉ. भीमराव आंबेडकर के निबंध ‘मेरी कल्पना का आदर्श समाज’ से है। लेखक यहाँ दासता का अर्थ केवल गुलामी के कानून तक सीमित नहीं रखते।

चरण 3: व्यापक अर्थ के बिंदु:
1. कानूनी पराधीनता के बिना भी दासता हो सकती है।
2. जब दूसरों द्वारा तय किए व्यवहार और कर्तव्य मानने पड़ें, वह भी दासता है।
3. जाति-प्रथा में पेशा चुनने की स्वतंत्रता नहीं होती।

चरण 4: आदर्श उत्तर:
आंबेडकर के अनुसार दासता केवल कानूनी गुलामी नहीं है। जब किसी व्यक्ति को दूसरों के निर्धारित कर्तव्य और व्यवहार मानने के लिए विवश होना पड़ता है, तब वह भी दासता है। जाति-प्रथा व्यक्ति को अपनी रुचि का पेशा चुनने नहीं देती, इसलिए वह भी दासता ही है।

अंतिम उत्तर:
लेखक ने दासता को ऐसी स्थिति माना है जिसमें व्यक्ति दूसरों द्वारा थोपे गए कर्तव्य निभाने को मजबूर हो।
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