Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :

‘श्रम विभाजन और जाति-प्रथा’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि श्रम विभाजन के व्यक्तिगत रुचि पर आधारित न होने के क्या दुष्परिणाम होते हैं ?

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आंबेडकर के अनुसार रुचि के बिना किया गया काम अरुचि, टालमटोल, कम कुशलता और बेरोज़गारी को जन्म देता है।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: संदर्भ:
‘श्रम विभाजन और जाति-प्रथा’ बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का पाठ है। इसमें उन्होंने कहा है कि जाति-प्रथा जन्म के आधार पर पेशा तय कर देती है, व्यक्ति की रुचि का ध्यान नहीं रखती।

चरण 2: मुख्य बिंदु:
जब काम व्यक्ति की रुचि और क्षमता के अनुसार नहीं बाँटा जाता, तब वह उसे मजबूरी में करता है। ऐसे काम में उसका मन नहीं लगता। वह टालमटोल करता है, कम काम करता है और कुशलता घटती है।

चरण 3: प्रतिदर्श उत्तर (लगभग 60 शब्द):
जब श्रम विभाजन व्यक्ति की रुचि पर आधारित नहीं होता, तब उसे अपना काम बोझ लगता है। वह अरुचि और दुर्भावना से काम करता है, इसलिए काम कम और घटिया होता है। लोग काम से बचने या उसे टालने लगते हैं। इससे उत्पादकता घटती है, लोग निर्धन और बेरोज़गार रहते हैं और समाज की आर्थिक हानि होती है।

अंतिम उत्तर:
रुचि के बिना काम करने से अकुशलता, कम उत्पादन, बेरोज़गारी और समाज की हानि होती है।
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