Question:

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में दीजिए :

लुट्टन सिंह के पक्ष में न तो राजमत था और न ही बहुमत, फिर भी उसे कुश्ती में विजय कैसे प्राप्त हुई ? ‘पहलवान की ढोलक’ पाठ के आधार पर लिखिए।

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दंगल में लुट्टन को ढोल की थाप से क्या संकेत मिलते थे, यह याद कीजिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
'पहलवान की ढोलक' फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी है।
श्यामनगर के मेले के दंगल में लुट्टन सिंह ने नामी पहलवान चाँद सिंह ('शेर के बच्चे') को चुनौती दी।
राजा साहब उसे लड़ने से रोकना चाहते थे और दर्शकों का बहुमत भी चाँद सिंह के पक्ष में था।

चरण 2: ढोल की प्रेरणा:
ऐसे में केवल ढोल की आवाज़ लुट्टन के साथ थी।
उसे ढोल के हर बोल में दाँव-पेंच का संकेत सुनाई देता था, जैसे 'चट् धा, गिड़ धा' यानी 'आ जा, भिड़ जा'।
ढोल की थाप से उसकी नसों में जोश भर गया और साहस बढ़ गया।

चरण 3: आत्मविश्वास और विजय:
ढोल के बोलों के अनुसार दाँव लगाकर उसने चाँद सिंह को चित कर दिया।
वह ढोल को ही अपना गुरु मानता था।

अंतिम उत्तर:
राजमत और बहुमत साथ न होने पर भी ढोल की प्रेरक थाप, अपने साहस और आत्मविश्वास के बल पर लुट्टन सिंह ने कुश्ती में विजय पाई।
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