Question:

काव्य-खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में दीजिए :

‘रुबाइयाँ’ शीर्षक कविता से ली गई – “हाथों पे झुलाती है उसे गोद-भरी” – पंक्ति के संदर्भ में ‘गोद-भरी’ प्रयोग का भाव स्पष्ट कीजिए।

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सोचिए कि जिस स्त्री की गोद संतान से भरी हो, उसके मन में कैसे भाव होते हैं।
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
यह पंक्ति फ़िराक गोरखपुरी की ‘रुबाइयाँ’ से ली गई है, जो हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह में संकलित है।
इसमें कवि ने एक माँ का चित्र खींचा है, जो आँगन में खड़ी होकर अपने नन्हे बच्चे को हाथों पर झुला रही है।

चरण 2: ‘गोद-भरी’ का शाब्दिक अर्थ:
‘गोद-भरी’ का अर्थ है वह स्त्री जिसकी गोद संतान से भरी हुई है।
भारतीय समाज में संतान का होना स्त्री के लिए सौभाग्य और पूर्णता माना जाता है।

चरण 3: प्रयोग का भाव:
इस प्रयोग से माँ के मन की तृप्ति, प्रसन्नता और गर्व प्रकट होता है।
बच्चे को पाकर उसका मातृत्व पूरा हो गया है, इसलिए वह स्नेह से भरकर उसे हाथों पर झुलाती है।
यह शब्द वात्सल्य रस को गहरा कर देता है।

अंतिम उत्तर:
‘गोद-भरी’ प्रयोग संतानवती माँ की संतुष्टि, सौभाग्य, गर्व और उमड़ते वात्सल्य भाव को प्रकट करता है।
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