Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए :

‘रुबाइयाँ’ में संतान के प्रति माँ के वात्सल्य की जो झलक दिखाई देती है उसे स्पष्ट कीजिए।

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रुबाइयों में माँ बच्चे को झुलाती, नहलाती और सँवारती है। इन दृश्यों में उसकी ममता झलकती है।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
‘रुबाइयाँ’ शायर फ़िराक़ गोरखपुरी की रचना है, जो ‘आरोह भाग 2’ में है। इसमें कवि ने घर-आँगन के दृश्यों के माध्यम से माँ और बच्चे के स्नेह का चित्र खींचा है।

चरण 2: वात्सल्य की झलकियाँ:
माँ चाँद के टुकड़े जैसे अपने बच्चे को आँगन में गोद में लेकर खड़ी है और उसे हाथों पर झुलाती तथा हवा में उछालती है। बच्चा खिलखिलाकर हँसता है और उसकी हँसी चारों ओर गूँज उठती है।

चरण 3: देखभाल का भाव:
माँ बच्चे को साफ़ पानी से नहलाती है, उसके उलझे बालों में कंघी करती है और घुटनों में थामकर कपड़े पहनाती है। उस समय बच्चा बड़े प्यार से माँ का मुँह देखता है।

चरण 4: उत्तर (लगभग 40 शब्द):
रुबाइयों में माँ बच्चे को आँगन में गोद में झुलाती, उछालती और नहलाकर बाल सँवारती है। बच्चे की खिलखिलाहट माँ के आनंद को बढ़ाती है। इन दृश्यों में माँ की ममता, कोमलता और स्नेहपूर्ण देखभाल का सजीव चित्र उभरता है।

अंतिम उत्तर:
रुबाइयों में माँ का वात्सल्य बच्चे को खिलाने, नहलाने और सँवारने के कोमल दृश्यों में प्रकट होता है।
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