Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए :

‘आँगन में ठुनक रहा है ज़िदयाया है, बालक तो हई चाँद पै ललचाया है’ – पंक्ति में बाल मनोविज्ञान के किस पक्ष का वर्णन हुआ है ?

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बच्चा चाँद जैसी दूर की वस्तु पाने की ज़िद करता है, यही बाल-हठ का मनोविज्ञान है।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
यह पंक्ति फ़िराक़ गोरखपुरी की रुबाई की है। इसमें माँ और ज़िद करते हुए बच्चे का दृश्य है, जो आँगन में चाँद के लिए मचल रहा है।

चरण 2: बाल-मनोविज्ञान का पक्ष:
बच्चे जिस वस्तु को देखते हैं, उसे पाना चाहते हैं, चाहे वह पहुँच से बाहर ही क्यों न हो। चाँद को पाने की यह ज़िद बाल-हठ का सुंदर चित्र है।
साथ ही बच्चे को दर्पण में चाँद का प्रतिबिंब दिखाकर बहलाया जा सकता है, यह भी बाल-स्वभाव का पक्ष है।

चरण 3: लगभग 40 शब्दों में उत्तर:
इस पंक्ति में बाल-हठ का वर्णन है। बालक आँगन में ठुनकता हुआ चाँद पाने की ज़िद करता है, यह जानते हुए भी नहीं कि वह दूर है। कवि ने बच्चे की अबोध इच्छा और मचलने के स्वभाव को बड़ी सहजता से दिखाया है।

अंतिम उत्तर:
इसमें बच्चे की ज़िद, यानी बाल-हठ और अप्राप्य वस्तु के प्रति उसके ललचाने के मनोविज्ञान का वर्णन है।
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