Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :

वैश्वीकरण के इस दौर में क्या भगत जी का चरित्र बाज़ार को सार्थकता और समाज में शांति स्थापित कर सकता है ? ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ के आधार पर लिखिए।

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भगत जी के छह आने की कमाई के नियम और केवल ज़रूरत की चीज़ खरीदने की आदत को आज के बाज़ार से जोड़िए।
Updated On: Oct 31, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: भगत जी का चरित्र:
‘बाज़ार दर्शन’ में भगत जी चूरन बेचने वाले संतोषी व्यक्ति हैं।
वे रोज़ केवल छह आने की कमाई होते ही चूरन बेचना बंद कर देते हैं और बचा चूरन बच्चों को मुफ़्त बाँट देते हैं।
बाज़ार में वे केवल ज़रूरत का जीरा और काला नमक खरीदते हैं, बाकी चमक-दमक उन्हें नहीं लुभाती।

चरण 2: आज के संदर्भ में:
वैश्वीकरण के दौर में बाज़ार दिखावे और होड़ को बढ़ा रहा है।
भगत जी जैसा संतोष और संयम अपनाया जाए तो बाज़ार ज़रूरत पूरी करने का साधन बनेगा, शोषण का नहीं।

अंतिम उत्तर:
हाँ, भगत जी का संयमी और संतोषी चरित्र बाज़ार को सार्थकता दे सकता है, क्योंकि वे केवल आवश्यकता के लिए बाज़ार जाते हैं। इससे लालच और प्रतिस्पर्धा घटेगी तथा समाज में शांति स्थापित होगी।
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