दिए गए लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए : (i) पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी (ii) रामधारी सिंह 'दिनकर' (iii) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद
'तुमुल' खण्डकाव्य के किसी एक सर्ग की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए ।
'तुमुल' खण्डकाव्य के आधार पर 'लक्ष्मण' की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए ।
'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य के आधार पर 'भरत' का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
'कर्मवीर भरत' खण्डकाव्य के किसी एक सर्ग का सारांश लिखिए ।
'कर्ण' खण्डकाव्य के नायक 'कर्ण' का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
'कर्ण' खण्डकाव्य के चतुर्थ सर्ग में वर्णित श्रीकृष्ण और कर्ण के संवाद की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए ।
'मातृभूमि के लिए' खण्डकाव्य के आधार पर 'चन्द्रशेखर आजाद' का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
'मातृभूमि के लिए' खण्डकाव्य के द्वितीय सर्ग 'संघर्ष' का सारांश लिखिए ।
'जय सुभाष' खण्डकाव्य के नायक 'सुभाष चन्द्र बोस' के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए ।
'जय सुभाष' खण्डकाव्य में वर्णित 'आजाद हिन्द सेना' के गठन की घटना का वर्णन कीजिए ।
'अग्रपूजा' खण्डकाव्य के आधार पर श्रीकृष्ण का चरित्र-चित्रण कीजिए।
'अग्रपूजा' खण्डकाव्य के 'आयोजन' सर्ग का कथानक का सारांश अपने शब्दों में लिखिए ।
'मेवाड़ मुकुट' खण्डकाव्य के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
'मेवाड़ मुकुट' खण्डकाव्य के द्वितीय सर्ग 'दौलत' की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए ।
'ज्योति जवाहर' खण्डकाव्य में कवि ने सम्राट अशोक के किन-किन गुणों का वर्णन किया है ?
'ज्योति जवाहर' खण्डकाव्य का कथानक संक्षेप में लिखिए ।
'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के किसी एक सर्ग का सारांश लिखिए ।
'मुक्तिदूत' खण्डकाव्य के आधार पर अंग्रेजी शासन के बर्बर अत्याचारों के विरोध में महात्मा गाँधी द्वारा किये गये जन आन्दोलनों का वर्णन कीजिए ।
दिए गए संस्कृत पद्यांश का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए : सार्थः प्रवसतो मित्रं भार्या मित्रं गृहे सतः । आतुरस्य भिषक् मित्रं दानं मित्रं मरिष्यतः ।।
दिए गए संस्कृत पद्यांश का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए : नीर-क्षीर-विवेके हंसालस्यं त्वमेव तनुषे चेत् । विश्वस्मिन्नधुनान्यः कुलव्रतं पालयिष्यति कः ।।
निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए : अलक्षेन्द्रः – भारतं एकं राष्ट्रम् इति तव वचनं विरुद्धम् । इह तावत् राजानः जनाः च परस्परं द्रुह्यन्ति । पुरुराजः - तत् सर्वम् अस्माकम् आन्तरिकः विषयः । बाह्यशक्तेः तत्र हस्तक्षेपः असह्यः यवनराज ! पृथग्धर्माः पृथग्भाषाभूषा अपि वयं सर्वे भारतीयाः । विशालम् अस्माकं राष्ट्रम् ।
निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए : वाराणस्यां प्राचीनकालादेव गेहे गेहे विद्यायाः दिव्यं ज्योतिः द्योतते । अधुनाऽपि अत्र संस्कृतवाग्धारा सततं प्रवहति, जनानां ज्ञानञ्च वर्द्धयति । अत्र अनेके आचार्याः मूर्धन्याः विद्वांसः वैदिकवाङ्मयस्य अध्ययने अध्यापने च इदानीं निरताः ।
निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : अगर धीरे चलो वह तुम्हें छू लेगी दौड़ों तो छूट जाएगी नदी अगर ले लो साथ वह चलती चली जाएगी कहीं भी यहाँ तक कि कबाड़ी की दुकान तक भी ।
निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : चरन-कमल बंदौं हरि राइ । जाकी कृपा पंगु गिरि लंधै, अन्धे को सब कछु दरसाई । बहिरौ सुनै गूँग पुनि बोलै, रंक चलै सिर छत्र धराइ । सूरदास स्वामी करुनामय, बार-बार बन्दौं तिहि पाइ ।।