भाषा और संस्कृति पर आधारित पद्यांश
काटा थी संस्कृति विभाज, भ्रांति
बहु धर्म-जाति-गति रूप-नाम,
बंदी बंध-जीवन, भू बिनाश।
विज्ञान-मृदु, जन प्रकृति-काम,
आये वृद्ध पुरुष, कहली –
मिथ्या जड़ बन्धन, सत्यराम,
नानृतं ज्योति सत्यं, मा भैः,
जय ज्ञान-ज्योति, तुम्हें प्रणाम।