भाषा और संस्कृति पर आधारित पद्यांश
काटा थी संस्कृति विभाज, भ्रांति
बहु धर्म-जाति-गति रूप-नाम,
बंदी बंध-जीवन, भू बिनाश।
विज्ञान-मृदु, जन प्रकृति-काम,
आये वृद्ध पुरुष, कहली –
मिथ्या जड़ बन्धन, सत्यराम,
नानृतं ज्योति सत्यं, मा भैः,
जय ज्ञान-ज्योति, तुम्हें प्रणाम।
विगत संस्कृति में कौन-कौन सी दीवारें थीं?
'जड़बन्ध मिथ्या है और राम सत्य है' यह उद्घोष करने कौन आया?
'नानृतं ज्योति सत्यं' का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उल्लेखित अंश का भावार्थ लिखिए।
कविता का शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।