'शृंगार' रस अथवा 'शांत' रस का लक्षण और एक उदाहरण लिखिए।
शृंगार रस प्रेम, सौंदर्य और आनंद का रस है। यह रस संयोग (मिलन) और वियोग (बिछड़ने) के रूप में प्रकट होता है। इसका स्थायी भाव रति (प्रेम) होता है।
उदाहरण: "प्रियतम संग जब आँखे चार हुईं, मन में उठी प्रेम की हिलोरें हज़ार हुईं।"
‘आचारण की सभ्यता’ निबंध के लेखक हैं:
‘हिन्दी नयी चाल में ढली’ यह कथन किस लेखक का है?
‘उसने कहा था’ कहानी के लेखक हैं:
‘पिंजरे की मैना’ निबंध संग्रह के लेखक हैं:
‘कलम का सिपाही’ के रचनाकार हैं:
'विभाव' (विस्तारक) श्रृंगार रस अथवा 'करण' रस का संक्षेप में उदाहरण अथवा परिभाषा लिखिए।
'संयोग श्रृंगार' रस अथवा 'करुण' रस का लक्षण सहित एक उदाहरण लिखिए।
'करुण रस' अथवा 'शान्त रस' का स्थायी भाव के साथ उदाहरण अथवा परिभाषा लिखिए
'वीर' रस अथवा 'हास्य' रस की परिभाषा लिखिए एवं एक उदाहरण दीजिए।
हर्ष रस अथवा 'द्वार' रस का स्थायी भाव के साथ उदाहरण परिभाषा लिखिए।