Question:

पत्थर की शिला पर लिखी कविता ‘जूझ’ कहानी के लेखक के द्वारा कब मिटाई जाती थी ?

Show Hint

पाठ में 'कंठस्थ' शब्द आया है। उसका अर्थ सोचिए।
  • मास्टर को दिखा देने के बाद
  • याद हो जाने के बाद
  • मित्रों को दिखा देने के बाद
  • मास्टर को सुना देने के बाद
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collegedunia
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग समझें:
यह प्रश्न आनंद यादव के आत्मकथात्मक उपन्यास-अंश 'जूझ' (वितान भाग 2) से है।
मास्टर सौंदलगेकर से प्रेरणा पाकर लेखक भैंस चराते-चराते फ़सलों और जंगली फूलों पर तुकबंदी करने लगा था।
कविता लिखने के लिए वह खीसे में कागज़ और पेंसिल रखने लगा।

चरण 2: शिला पर कविता लिखना:
पाठ में लिखा है कि जब कागज़-पेंसिल न होते तो वह लकड़ी के छोटे टुकड़े से भैंस की पीठ पर रेखा खींचकर लिखता या पत्थर की शिला पर कंकड़ से लिख लेता।
पाठ के अनुसार, 'जब कंठस्थ हो जाती तो पोंछ देता।'
कंठस्थ होने का अर्थ है याद हो जाना।

चरण 3: अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
पाठ में मास्टर को दिखाने की बात अलग से आती है, जब रविवार को कोई कविता बन जाती तो सोमवार को वह मास्टर को दिखाता था।
शिला पर लिखी कविता को मिटाने का संबंध मास्टर को दिखाने, सुनाने या मित्रों को दिखाने से नहीं, केवल याद हो जाने से है।
इसलिए विकल्प 1, 3 और 4 गलत हैं।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 2 : याद हो जाने के बाद।
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