Question:

यशोधर बाबू अपने मातहतों से छुट्टी के समय मनोरंजक बात क्यों करते थे ?

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सोचें कि दिनभर दफ़्तर में यशोधर बाबू का व्यवहार कैसा रहता था।
  • दिनभर के शुष्क व्यवहार का निराकरण करने के लिए
  • अपने काम का भार अपने मातहतों पर डालने के लिए
  • कर्मचारियों को देर तक दफ़्तर में रोकने के लिए
  • कर्मचारियों और अपने बीच की दूरी समाप्त करने के लिए
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: पाठ का प्रसंग:
'सिल्वर वैडिंग' मनोहर श्याम जोशी की कहानी है, जो वितान भाग 2 में संकलित है।
यशोधर बाबू दफ़्तर में सेक्शन ऑफ़िसर हैं और दिनभर अपने मातहतों से काम के कारण रूखा और अनुशासन भरा व्यवहार करते हैं।

चरण 2: मनोरंजक बात का कारण:
छुट्टी के समय वे मातहतों से कोई हल्की, मनोरंजक बात कह देते थे।
कहानी के अनुसार ऐसा वे दिनभर के अपने शुष्क व्यवहार का प्रायश्चित या निराकरण करने के लिए करते थे।
इससे संबंधों की कड़वाहट दूर रहती थी।

चरण 3: अन्य विकल्प:
विकल्प 2 - वे अपना काम मातहतों पर डालने वाले व्यक्ति नहीं थे।
विकल्प 3 - कर्मचारियों को देर तक रोकना उनका उद्देश्य नहीं था, बात छुट्टी के समय हल्के मन से होती थी।
विकल्प 4 - वे दूरी पूरी तरह मिटाना नहीं, केवल रूखेपन की भरपाई करना चाहते थे।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 1 - दिनभर के शुष्क व्यवहार का निराकरण करने के लिए।
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