Question:

यशोधर बाबू बच्चों की तरक्की की खुशी को भी ‘समहाउ इंप्रापर’ क्यों अनुभव करते थे ?

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सोचिए, तरक्की के बाद बच्चों और यशोधर बाबू के आपसी संबंध में क्या बदलाव आया।
  • बच्चों ने उन्हें आदर देना बंद कर दिया था।
  • इससे अपनों में परायापन पैदा हो गया था।
  • इससे बच्चों में स्वच्छंदता बढ़ गई थी।
  • इससे बच्चों की जीवन-शैली आधुनिक हो गई थी।
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
‘सिल्वर वैडिंग’ मनोहर श्याम जोशी की कहानी है, जो वितान भाग 2 में संकलित है।
इसके नायक यशोधर बाबू पुराने संस्कारों वाले व्यक्ति हैं, जबकि उनके बच्चे आधुनिक विचारों के हैं।

चरण 2: ‘समहाउ इंप्रापर’ का भाव:
‘समहाउ इंप्रापर’ यशोधर बाबू का तकिया कलाम है, जिसका अर्थ है – किसी तरह अनुचित लगना।
बच्चों की तरक्की से वे खुश तो थे, पर तरक्की के साथ बच्चे उनसे दूर होते गए। वे अपने फ़ैसले स्वयं लेने लगे और पिता की राय को महत्व नहीं देते थे।
इस प्रकार अपने ही घर में यशोधर बाबू को परायापन महसूस होने लगा। इसीलिए यह खुशी भी उन्हें कुछ अनुचित-सी लगती थी।

चरण 3: अन्य विकल्प:
बच्चों ने उन्हें आदर देना पूरी तरह बंद नहीं किया था, इसलिए विकल्प (1) ठीक नहीं।
स्वच्छंदता (3) और आधुनिक जीवन-शैली (4) परिणाम के अंश हैं, पर मूल पीड़ा अपनों में पैदा हुआ परायापन है।

अंतिम उत्तर:
विकल्प (2) – इससे अपनों में परायापन पैदा हो गया था।
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