Question:

किशनदा की तरह घर-गृहस्थी का बबाल न पालकर जीवन समाज के नाम समर्पित करने की भावना यशोधर बाबू के मन में क्यों आती थी ?

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'सिल्वर वैडिंग' में पुरानी और नई पीढ़ी के टकराव को याद कीजिए।
  • पत्नी-बच्चों से मतभेद होने के कारण
  • घर-गृहस्थी के जंजाल से थकने के कारण
  • जीवन का मर्म समझ में आने के कारण
  • परिवार से मोह भंग हो जाने के कारण
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

चरण 1: प्रसंग:
'सिल्वर वैडिंग' मनोहर श्याम जोशी की कहानी है, जो 'वितान' में संकलित है।
किशनदा यशोधर बाबू के आदर्श थे। उन्होंने विवाह नहीं किया था और अपना जीवन समाज-सेवा में लगा दिया था।

चरण 2: यशोधर बाबू की पारिवारिक स्थिति:
यशोधर बाबू पुराने संस्कारों वाले व्यक्ति थे, जबकि उनकी पत्नी और बच्चे आधुनिक विचारों के थे।
खान-पान, पहनावे, रिश्तेदारी और आदतों को लेकर घर में बार-बार मतभेद होते थे।

चरण 3: भावना का कारण:
जब पत्नी और बच्चों से इस तरह मतभेद होते, तब यशोधर बाबू को लगता कि किशनदा की तरह गृहस्थी का बवाल न पालकर जीवन समाज के नाम कर दिया होता तो अच्छा होता।
अतः इस भावना का कारण पत्नी-बच्चों से मतभेद है।

चरण 4: अन्य विकल्प:
गृहस्थी से थकना, जीवन का मर्म समझना या परिवार से पूरा मोह भंग होना कहानी में नहीं दिखाया गया। यशोधर बाबू परिवार से जुड़े रहे, बस मतभेदों से दुखी होते थे।

अंतिम उत्तर:
विकल्प 1 - पत्नी-बच्चों से मतभेद होने के कारण
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