List of practice Questions

ये लोग आधुनिक भारत के नए ‘शरणार्थी’ हैं, जिन्हें औद्योगीकरण के झंझावात ने अपने घर-ज़मीन से 
उखाड़कर हमेशा के लिए विस्थापित कर दिया है। 
प्रकृति और इतिहास के बीच यह गहरा अंतर है। 
बाढ़ या भूकंप के कारण जो लोग एक बार अपने स्थान से बाहर निकलते हैं, वे जब स्थिति टलती है तो वे दोबारा अपने 
जन्म-भूमीय परिवेश में लौट भी आते हैं। 
किन्तु विकास और प्रगति के नाम पर जब इतिहास लोगों को जड़मूल सहित उखाड़ता है, तो वे अपनी ज़मीन पर 
वापस नहीं लौट पाते। 
उनका विस्थापन एक स्थायी विस्थापन बन जाता है। 
ऐसे लोग न सिर्फ भौगोलिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी नहीं उखड़ते, बल्कि उसका सामाजिक और 
आवासीय स्तर भी हमेशा के लिए नष्ट हो जाते हैं। 
 

गद्यांश के आधार पर दिए गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कर लिखिए :

मैं तो शहर से या आदमियों से डरकर जंगल इसलिए भागा था कि मेरे सिर पर सींग निकल रहे थे और डर था कि किसी-न-किसी दिन किसी की नज़र मुझ पर ज़रूर पड़ जाएगी।
जंगल में मेरा पहला ही दिन था जब मैंने बबूल के पेड़ के नीचे एक शेर को बैठे हुए देखा। शेर का मुँह खुला हुआ था। शेर का खुला मुँह देखकर मेरा जो हाल होना था वही हुआ, यानी मैं डर के मारे एक झाड़ी के पीछे छिप गया।
मैंने देखा कि झाड़ी की ओट भी ग़ज़ब की चीज़ है। अगर झाड़ी न होती तो न शेर का मुँह-खुला और न ही उसमें डर पाना संभव हो पाता।
कुछ देर बाद मैंने देखा कि जंगल के छोटे-छोटे जानवर एक लाइन से चले आ रहे हैं और शेर के मुँह में घुसे चले जा रहे हैं। यह बिना हिले-डुले, बिना बवाल, जानवरों की ग़ज़ब की ग़ज़ल लग रही है। यह दृश्य देखकर मैं हैरान हो गया।