Question:

‘दूसरा देवदास’ कहानी के माध्यम से लेखक ने प्रेम को बंबईया फिल्मों की परिपाटी से अलग हटाकर उसे पवित्र और स्थायी स्वरूप प्रदान किया है। सिद्ध कीजिए। 
 

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‘दूसरा देवदास’ पारंपरिक प्रेम की सीमाओं को तोड़कर उसे व्यवहारिक और आदर्श बनाता है — यही इसका नया स्वरूप है।
Updated On: Jul 18, 2025
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Solution and Explanation

‘दूसरा देवदास’ कहानी एक नव दृष्टिकोण की कहानी है जहाँ प्रेम को केवल भावुकता, दुःख और आत्म-विनाश से ऊपर उठाया गया है।
बंबईया फिल्मों में ‘देवदास’ की छवि एक दुखी प्रेमी की रही है जो शराब, संत्रास और अंततः मृत्यु की ओर बढ़ता है।
लेखक ने इस रूढ़ छवि को तोड़ते हुए ‘दूसरे देवदास’ के रूप में एक ऐसा नायक रचा है जो प्रेम में परिपक्व है।
वह अपने प्रेम को आदर्श, विवेकपूर्ण और सामाजिक रूप से स्वीकार्य बनाता है।
कहानी में प्रेम केवल एक रोमांटिक भाव नहीं बल्कि जीवन के उत्तरदायित्वों, रिश्तों की समझ और आत्म-संयम का प्रतीक बनकर उभरता है।
‘दूसरा देवदास’ प्रेम को आदर्श और नैतिक दृष्टि से प्रस्तुत करता है, जहाँ न कोई परित्याग है, न त्रासदी — बल्कि जीवन का विस्तार है।
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