Question:

‘सदानीरा नदियाँ अब माताओं के गालों के आँसू भी नहीं बहा सकतीं’ कथन के संदर्भ में लिखिए देश के अन्य हिस्सों में नदियों की क्या स्थिति है और इसके क्या कारण हैं? 
 

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जल है तो जीवन है — नदियों को बचाने के लिए जागरूकता, नियमों का पालन और सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
Updated On: Jul 18, 2025
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Solution and Explanation

‘सदानीरा नदियाँ अब माताओं के गालों के आँसू भी नहीं बहा सकतीं’ यह कथन केवल एक भावात्मक उद्घोषणा नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरणीय संकट की वास्तविकता को दर्शाता है।
आज देशभर की नदियाँ प्रदूषण, अतिक्रमण, औद्योगिकीकरण और अव्यवस्थित जल प्रबंधन के कारण अपना अस्तित्व खोती जा रही हैं।
गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा जैसी पवित्र और जीवनदायिनी नदियाँ आज गंदे नाले बन चुकी हैं।
इनमें गिरते औद्योगिक अपशिष्ट, प्लास्टिक कचरा और मलजल ने न केवल इनकी स्वच्छता छीन ली है, बल्कि इनके पारिस्थितिक तंत्र को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
जलवायु परिवर्तन, अवैज्ञानिक नहरें, वर्षा की असमानता और वनों की कटाई ने स्थिति को और बदतर बना दिया है।
नदियाँ अब न तो खेतों को सींचती हैं, न प्यास बुझाती हैं, न ही संवेदनाओं को बहने देती हैं।
इस कथन के माध्यम से यह समझा जा सकता है कि यदि हम जल स्रोतों की रक्षा नहीं करेंगे तो नदियाँ केवल भूगोल की रेखा बनकर रह जाएँगी।
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