Question:

‘जो है वहीं खड़ा है 
बिना किसी रूप के’ 
– ‘बनारस’ कविता से उद्धृत यह पंक्ति बनारस शहर की किस विशेषता की ओर संकेत करती है?
 

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यह पंक्ति बनारस को केवल एक शहर नहीं, बल्कि सनातन चेतना और भारतीय आत्मा के प्रतीक के रूप में चित्रित करती है।
Updated On: Jul 18, 2025
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Solution and Explanation

‘बनारस’ कविता की यह पंक्ति उस शाश्वत और निराकार तत्व की ओर संकेत करती है जो बनारस शहर की आत्मा है।
‘जो है वहीं खड़ा है’ से तात्पर्य है कि यह नगर युगों-युगों से अपने स्थान पर अडिग खड़ा है — समय के प्रवाह से अछूता, लेकिन सबको समेटे हुए।
‘बिना किसी रूप के’ — यह पंक्ति बनारस के उस अध्यात्मिक स्वरूप की ओर इशारा करती है जो किसी मूर्ति या पहचान का मोहताज नहीं है।
यह निराकार, व्यापक, अनुभवजन्य है — बनारस का आत्मा रूप जो स्थिर है परन्तु जीवंत भी है।
कविता इस पंक्ति के माध्यम से बनारस की धार्मिक, सांस्कृतिक और आत्मिक स्थायित्व की भावना को उजागर करती है।
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