Question:

‘प्रेम के लिए किसी निश्चित व्यक्ति, समय और स्थिति का होना आवश्यक नहीं है।’ – ‘दूसरा देवदास’ पाठ के आधार पर इस कथन की पुष्टि कीजिए।
 

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‘दूसरा देवदास’ पाठ में प्रेम को स्थूल रूप से नहीं, बल्कि सूक्ष्म और आत्मिक स्तर पर समझाया गया है।
Updated On: Jul 18, 2025
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Solution and Explanation

‘दूसरा देवदास’ पाठ इस कथन की पूरी तरह पुष्टि करता है क्योंकि इसमें प्रेम एक स्थायी, भावनात्मक और आत्मिक अनुभव के रूप में चित्रित है।
पात्रों के बीच प्रेम किसी तयशुदा योजना, परिस्थिति या औपचारिक रिश्ते पर आधारित नहीं है।
पारो और देवदास भले ही सामाजिक रूप से अलग हो जाते हैं, पर उनका भावनात्मक जुड़ाव समाप्त नहीं होता।
दूसरी ओर, जब देवदास की मुलाकात दूसरी नायिका से होती है, तो वह परिस्थितिजन्य नहीं, बल्कि मानसिक समानता और आत्मीयता पर आधारित प्रेम बन जाता है।
यह पाठ स्पष्ट करता है कि प्रेम न समय देखता है, न सामाजिक दर्जा — वह मन और आत्मा की सहमति पर आधारित होता है।
इसलिए यह कथन पूरी तरह सटीक है कि प्रेम किसी पूर्व निर्धारित व्यक्ति, समय या स्थिति का मोहताज नहीं होता।
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