Question:

गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए :

‘काले मेघा पानी दे’ पाठ के आधार पर लिखिए कि इन्दरसेना को लेखक ‘मेढक-मंडली’ क्यों कहता था ? जीजी के बार-बार कहने पर भी वह इन्दरसेना पर पानी फेंकने को राजी क्यों नहीं होता ?

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लड़कों की उछल-कूद और कीचड़ को मेढकों से जोड़िए। लेखक के अंधविश्वास-विरोधी विचार और पानी की कमी पर ध्यान दीजिए।
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Solution and Explanation

चरण 1: पाठ का प्रसंग:
'काले मेघा पानी दे' धर्मवीर भारती का संस्मरण है।
गाँव में भयंकर सूखा पड़ने पर किशोरों की एक टोली नंगे बदन, केवल लंगोटी पहनकर गली-गली घूमती थी।
यह टोली 'गगरी फूटी बैल पियासा' और 'काले मेघा पानी दे' गाती हुई लोगों से पानी माँगती थी।

चरण 2: 'मेढक-मंडली' कहने का कारण:
लड़के कीचड़ में लोटते, उछलते-कूदते और शोर मचाते थे, जैसे वर्षा में मेढक टर्राते और उछलते हैं।
जो लोग उनके नंगे शरीर, उछल-कूद, शोर-शराबे और गली में होने वाले कीचड़ से चिढ़ते थे, वे उन्हें 'मेढक-मंडली' कहते थे।
लेखक भी इस अंधविश्वास से सहमत नहीं था, इसलिए वह भी उन्हें यही नाम देता था।

चरण 3: पानी फेंकने को राजी न होने का कारण:
लेखक आर्यसमाजी विचारों से प्रभावित था और कुमार-सुधार सभा का उपमंत्री था।
वह इसे अंधविश्वास मानता था।
उसका तर्क था कि जब लोग पानी की एक-एक बूँद को तरस रहे हैं, तब बड़ी कठिनाई से जमा किया पानी इस तरह फेंकना पानी की निर्मम बर्बादी है और इससे देश की भारी क्षति होती है।

अंतिम उत्तर:
कीचड़ में मेढकों की तरह उछल-कूद और शोर करने के कारण लेखक इन्दरसेना को 'मेढक-मंडली' कहता था, और सूखे में पानी फेंकने को अंधविश्वास तथा पानी की बर्बादी मानने के कारण वह जीजी के कहने पर भी पानी फेंकने को राजी नहीं होता था।
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