Question:

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :

‘पैतृक पेशे’ से क्या अभिप्राय है ? ‘श्रम विभाजन और जाति-प्रथा’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

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पैतृक पेशा जन्म से मिला काम है, जिसमें रुचि और योग्यता नहीं देखी जाती। इसके दुष्परिणाम भी लिखिए।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: पाठ और लेखक:
‘श्रम विभाजन और जाति-प्रथा’ डॉ. भीमराव आंबेडकर का निबंध है। इसमें लेखक ने जाति-प्रथा को श्रम-विभाजन का अस्वाभाविक रूप बताया है।

चरण 2: पैतृक पेशे का अर्थ:
पैतृक पेशा वह काम है जो पिता या पूर्वज करते आए हों और संतान को भी वही काम करना पड़े। इसमें व्यक्ति की रुचि, योग्यता या इच्छा नहीं देखी जाती, केवल जन्म देखा जाता है।

चरण 3: लेखक का विचार:
लेखक के अनुसार जाति-प्रथा व्यक्ति को जन्म से ही एक पेशे में बाँध देती है। चाहे पेशा अनुपयुक्त या अपर्याप्त हो और भूखों मरने की नौबत आ जाए, तब भी वह दूसरा पेशा नहीं चुन सकता। इससे समाज में बेरोज़गारी बढ़ती है।

चरण 4: आदर्श उत्तर (लगभग 60 शब्द):
पैतृक पेशे का अर्थ है पिता या पूर्वजों द्वारा किया जाने वाला काम, जिसे संतान को जन्म के आधार पर अपनाना पड़ता है। उसमें व्यक्ति की रुचि और क्षमता का ध्यान नहीं रखा जाता। आंबेडकर के अनुसार जाति-प्रथा पेशा बदलने की छूट नहीं देती, जिससे बेरोज़गारी बढ़ती है और अरुचि से काम बिगड़ता है।

अंतिम उत्तर:
पैतृक पेशा वह पेशा है जो जन्म के आधार पर पूर्वजों से संतान पर थोपा जाता है, चाहे उसमें उसकी रुचि न हो।
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